प्रस्तावित परिसीमन के खिलाफ राजभवन पहुंचे आदिवासी नेता और संगठन के प्रतिनिधि

रांची, 15 सितंबर। प्रस्तावित परिसीमन से आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले असर को लेकर बंधु तिर्की के नेतृत्व में विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल का ध्यान पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव, विस्थापन, पलायन और संवैधानिक अधिकारों की ओर दिलाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन को सिर्फ मौजूदा जनसंख्या के आधार पर न देखा जाए। पाँचवीं अनुसूची की भावना, ऐतिहासिक परिस्थितियाँ, आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक-भौगोलिक संरचना और विकास परियोजनाओं से हुए विस्थापन को भी ध्यान में रखा जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने चिंता जताई कि प्रस्तावित परिसीमन से विधानसभा और लोकसभा सीटों के अनुपात में कमी आने की आशंका है, जिससे आदिवासी प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। उन्होंने माँग की कि आदिवासी समाज का वर्तमान राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम न हो और एसटी-एससी सीटों का मौजूदा अनुपात बनाए रखते हुए सीटें बढ़ाई जाएँ।

राज्यपाल का सुझाव
राज्यपाल ने सुझाव दिया कि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन पर स्पष्ट प्रस्ताव पारित किया जाए और उसे राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने संविधान की पाँचवीं अनुसूची के पैरा-3 के तहत राज्यपाल से राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजने की भी माँग की। इसमें आदिवासी क्षेत्रों की स्थिति, जनसांख्यिकीय बदलाव और परिसीमन के संभावित प्रभाव का आकलन शामिल हो। उन्होंने पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की तर्ज पर परिसीमन प्रभावों के अध्ययन के लिए नई समिति बनाने का भी अनुरोध किया।

प्रतिनिधिमंडल में बंधु तिर्की (पूर्व मंत्री), डॉ. बासवी किड़ो, शशि पन्ना, रमा खलखो (पूर्व महापौर), लक्ष्मी नारायण मुंडा, दयामनी बारला, डॉ. रामचंद्र उराँव, अजय तिर्की, शिवा कच्छप और अनिल उराँव शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि उसी दिन आदिवासी भूमिज मुण्डा युवा संगठन, चाण्डिल के प्रतिनिधिमंडल ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर चाण्डिल डैम जलाशय में समाज की पारंपरिक भागीदारी और हड़शाली-मेगालिथ संरक्षण से जुड़े मुद्दे रखे।

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