रांची: झारखंड सरकार द्वारा जेईटी समेत जेपीएससी की 21 परीक्षाओं और 1744 पदों की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने के आदेश के खिलाफ दायर अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायाधीश जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे अदालत की शरण लेने वाले नवनियुक्त अफसरों को बड़ी राहत मिली है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने बहस की। हाईकोर्ट से जिन लोगों को राहत मिली है, उनमें सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी शामिल हैं। इन्हीं की ओर से याचिकाएं दायर की गई थीं। जेपीएससी परीक्षा के जरिए चयनित होकर नौकरी कर रहे कई अन्य लोगों ने भी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
पृष्ठभूमि
राज्य सरकार ने हाल ही में जेईटी (झारखंड पात्रता परीक्षा) सहित जेपीएससी की 21 परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी किया था। इसमें विश्वविद्यालय शिक्षकों की नियुक्ति के लिए दूसरी बार आयोजित जेईटी, सिविल सेवा, वन सेवा, एपीपी, ड्रग इंस्पेक्टर, पॉलिटेक्निक व्याख्याता समेत कई पद शामिल थे। सीडीपीओ जैसे कुछ पदों पर मुख्यमंत्री स्वयं नियुक्ति पत्र सौंप चुके थे और चयनित अभ्यर्थी कार्यरत थे। इस फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट के रोक आदेश से फिलहाल सरकार का रद्दीकरण आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। इससे प्रभावित नवनियुक्त अधिकारियों को तात्कालिक राहत मिली है। मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित की जाएगी।

